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हज का तरीका: दिन-ब-दिन पूरी गाइड और दुआएँ

8 से 13 ज़िलहिज्जा तक दिन-ब-दिन हज: मिना, अराफ़ात, मुज़दलिफ़ा, रमी, क़ुर्बानी और तवाफ़, हज के प्रकार, दुआएँ और पवित्र स्थान।

इस गाइड का मूल पाठ हनफ़ी मज़हब के अनुसार है; जहाँ मज़हबों में मतभेद है, वह पाठ में बताया गया है। अगर आपका मज़हब शाफ़ई, मालिकी या हंबली है तो जो अहकाम अलग हैं वे नीचे अलग से दिखाए जाते हैं (अपना मज़हब आप सेटिंग्स में चुन सकते हैं)। अपनी ख़ास सूरतों में अपने क़ाफ़िले के आलिम या किसी भरोसेमंद आलिम से पूछें।

हज के प्रकार

हज-ए-इफ़राद

सिर्फ़ हज की नीयत से इहराम बाँधकर किया जाने वाला हज।

हज-ए-तमत्तो

हज के महीनों (शव्वाल, ज़ीक़ादा और ज़िलहिज्जा के पहले दस दिन) में पहले उमरे का इहराम बाँधकर उमरा किया जाता है और इहराम खोल दिया जाता है; फिर उसी साल हज के लिए (आम तौर पर यौमुत-तरविया को) मक्का से दोबारा इहराम बाँधा जाता है।

हज-ए-क़िरान

उमरा और हज दोनों के लिए एक साथ इहराम बाँधा जाता है; उमरा करने के बाद इहराम नहीं खोला जाता, उसी इहराम से हज भी पूरा किया जाता है।

8 ज़ुल-हिज्जा · यौमुत-तरविया

मक्का → मिना

  1. हज का इहराम (तमत्तो)

  2. मिना जानासुन्नत

9 ज़ुल-हिज्जा · अरफ़ा का दिन

अरफ़ात → मुज़दलिफ़ा

  1. वुक़ूफ़-ए-अरफ़ातफ़र्ज़

  2. मुज़दलिफ़ा जाना

10 ज़ुल-हिज्जा · ईद-उल-अज़हा का पहला दिन

मुज़दलिफ़ा → मिना → मक्का

  1. वुक़ूफ़-ए-मुज़दलिफ़ावाजिब

  2. बड़े जमरे (अक़बा) की रमीवाजिब

  3. शुक्राने की क़ुर्बानीवाजिब

  4. हल्क़ और पहला तहल्लुलवाजिब

  5. तवाफ़-ए-ज़ियारत (इफ़ाज़ा)फ़र्ज़

11 ज़ुल-हिज्जा · ईद-उल-अज़हा का दूसरा दिन

मिना

  1. तीनों जमरों की रमीवाजिब

  2. रात मिना में गुज़ारनासुन्नत

12 ज़ुल-हिज्जा · ईद-उल-अज़हा का तीसरा दिन

मिना → मक्का

  1. तीनों जमरों की रमीवाजिब

  2. तवाफ़-ए-ज़ियारत का आख़िरी दिन

13 ज़ुल-हिज्जा · ईद-उल-अज़हा का चौथा दिन

मिना (इख़्तियारी)

  1. रमी (मिना में रुकने वाले)

तवाफ़-ए-विदावाजिब

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फ़र्ज़, वाजिब और सुन्नत

फ़र्ज़: इहराम (शर्त) · वुक़ूफ़-ए-अरफ़ात (रुक्न) · तवाफ़-ए-ज़ियारत (इफ़ाज़ा) (रुक्न)

वाजिब: वुक़ूफ़-ए-मुज़दलिफ़ा · सई · शैतान को कंकरियाँ मारना (रमी-ए-जिमार) · सिर मुँडाना या बाल कटवाना (हल्क़ या क़स्र) · तमत्तो और क़िरान हज में शुक्राने की क़ुर्बानी · ईद के दिन पहले रमी, फिर (तमत्तो और क़िरान में) क़ुर्बानी, फिर हल्क़ की तरतीब का ख़याल रखना · दिन में वुक़ूफ़ करने वाले का सूरज डूबने तक अरफ़ात में रहना · तवाफ़-ए-ज़ियारत ईद के पहले तीन दिनों के अंदर करना · मक्का के बाहर से आने वालों (आफ़ाक़ी) के लिए तवाफ़-ए-विदा

दुआएँ

तल्बिया

इहराम बाँधते वक़्त और इहराम की पूरी मुद्दत में

لَبَّيْكَ اللّٰهُمَّ لَبَّيْكَ، لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ، إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ، لَا شَرِيكَ لَكَ

उच्चारण: लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक, लब्बैक ला शरीक लक लब्बैक, इन्नल-हम्द वन्-निअमत लक वल्-मुल्क, ला शरीक लक।

अर्थ: हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह, मैं हाज़िर हूँ! हाज़िर हूँ, तेरा कोई शरीक नहीं, मैं हाज़िर हूँ! बेशक तारीफ़ और नेमत तेरी ही है, और बादशाहत भी; तेरा कोई शरीक नहीं।

बुख़ारी, हज 26; मुस्लिम, हज 19

उमरे की नीयत

मीक़ात पर, इहराम की नमाज़ के बाद

اللّٰهُمَّ إِنِّي أُرِيدُ الْعُمْرَةَ فَيَسِّرْهَا لِي وَتَقَبَّلْهَا مِنِّي

उच्चारण: अल्लाहुम्म इन्नी उरीदुल्-उमरत फ़-यस्सिर्हा ली व तक़ब्बल्हा मिन्नी।

अर्थ: ऐ अल्लाह! मैं उमरा करना चाहता हूँ; इसे मेरे लिए आसान कर दे और मुझसे क़बूल फ़रमा।

फ़िक़्ह की किताबों में दर्ज नीयत के अल्फ़ाज़; नीयत दिल से होती है, ज़बान से कहना अच्छा है।

हज की नीयत

हज का इहराम बाँधते वक़्त

اللّٰهُمَّ إِنِّي أُرِيدُ الْحَجَّ فَيَسِّرْهُ لِي وَتَقَبَّلْهُ مِنِّي

उच्चारण: अल्लाहुम्म इन्नी उरीदुल्-हज्ज फ़-यस्सिर्हु ली व तक़ब्बल्हु मिन्नी।

अर्थ: ऐ अल्लाह! मैं हज करना चाहता हूँ; इसे मेरे लिए आसान कर दे और मुझसे क़बूल फ़रमा।

फ़िक़्ह की किताबों में दर्ज नीयत के अल्फ़ाज़

पूरा मार्गदर्शन मुफ़्त Mubarly ऐप में है: हर चरण की व्याख्या, चारों मसलक, और दुआएँ और बहुत कुछ। ↓

मुक़द्दस मक़ामात

उमराह करने का तरीका चरण-दर-चरण →

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