इस गाइड का मूल पाठ हनफ़ी मज़हब के अनुसार है; जहाँ मज़हबों में मतभेद है, वह पाठ में बताया गया है। अगर आपका मज़हब शाफ़ई, मालिकी या हंबली है तो जो अहकाम अलग हैं वे नीचे अलग से दिखाए जाते हैं (अपना मज़हब आप सेटिंग्स में चुन सकते हैं)। अपनी ख़ास सूरतों में अपने क़ाफ़िले के आलिम या किसी भरोसेमंद आलिम से पूछें।
अदा करने का तरीक़ा
इहराम बाँधनाफ़र्ज़
उम्र में एक बार उमरा करना हनफ़ी और मालिकी मज़हब में सुन्नत-ए-मुअक्कदा और शाफ़ई और हंबली मज़हब में फ़र्ज़ है।
तल्बियाफ़र्ज़
इहराम बाँधते वक़्त नीयत के साथ एक बार तल्बिया (या उसकी जगह कोई ज़िक्र) कहना इहराम की शर्त है; फिर चलते हुए, चढ़ाई-उतराई पर और क़ाफ़िलों से मिलते वक़्त बार-बार कहना सुन्नत है।
उमरे का तवाफ़फ़र्ज़
मस्जिद-ए-हराम में दाख़िल हुआ जाता है।
तवाफ़ की नमाज़वाजिब
तवाफ़ के बाद मुमकिन हो तो मक़ाम-ए-इब्राहीम के पीछे, वरना मस्जिद में किसी मुनासिब जगह दो रकअत तवाफ़ की नमाज़ पढ़ी जाती है (हनफ़ी और मालिकी मज़हब में वाजिब, शाफ़ई और हंबली मज़हब में सुन्नत; हनफ़ी मज़हब में मकरूह वक़्त निकल जाने पर पढ़ी जाती है)।
सईवाजिब
यह तवाफ़ के बाद की जाती है।
बाल मुँडवाकर इहराम खोलनावाजिब
मर्द सिर के बाल मुँडवाते हैं (हल्क़; यह अफ़ज़ल है) या छोटे करवाते हैं (क़स्र)।
तवाफ़
तवाफ़ के हर चक्कर के लिए सुन्नत में कोई ख़ास दुआ तय नहीं है; आप जो चाहें दुआ, ज़िक्र और क़ुरआन पढ़ सकते हैं।
सई
सई सफ़ा से शुरू होकर मरवा पर ख़त्म होती है।
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फ़र्ज़ · वाजिब
फ़र्ज़, वाजिब और सुन्नत
फ़र्ज़: इहराम (शर्त) · तवाफ़ (रुक्न)
वाजिब: सई · सिर मुँडाना या बाल कटवाना (हल्क़ या क़स्र)
इहराम की पाबंदियाँ
- मर्दों का सिला हुआ (बदन के नाप से सिला) कपड़ा पहनना, सिर और (हनफ़ी और मालिकी मज़हब में) चेहरा ढकना; पैर के ऊपरी हिस्से और टख़नों को ढकने वाले मोज़े (ख़ुफ़) या जूते पहनना (चप्पल या सैंडल पहनी जाती है)
- औरतों का चेहरे को छूने वाली किसी चीज़ से चेहरा ढकना; दस्ताने पहनना (शाफ़ई, मालिकी और हंबली मज़हब में मना है; हनफ़ी मज़हब में जायज़ है, लेकिन बचना बेहतर है)
- ख़ुशबू लगाना, ख़ुशबूदार साबुन और क्रीम इस्तेमाल करना
- सिर, दाढ़ी और बदन के बाल काटना या उखाड़ना; नाख़ून काटना
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मीक़ात
- ज़ुल-हुलैफ़ा (अब्यार-ए-अली)
- जुहफ़ा (राबिग़)
- क़रनुल-मनाज़िल (सैलुल-कबीर)
- यलमलम
- ज़ात-ए-इर्क़
- तनईम (मस्जिद-ए-आइशा)
फ़ोन साइलेंट हो तब भी अलार्म की आवाज़ में अज़ान सुनेंमुफ़्त · बिना इंटरनेट · 20 भाषाएँ · चारों मसलक
