नमाज़ के बाद की तस्बीह
सुब्हानल्लाह × 33
سُبْحَانَ اللّٰهِ
अल्लाह हर कमी से पाक है।
अल्हम्दुलिल्लाह × 33
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ
सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है।
अल्लाहु अकबर × 33
اَللّٰهُ أَكْبَرُ
अल्लाह सबसे बड़ा है।
ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू… × 1
لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और तारीफ़ उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
संख्या और क्रम: हदीस शरीफ़ — मुस्लिम, मसाजिद 146 (नं. 597)। सहीह।
तस्बीह काउंटर
सुब्हानल्लाह × 33
سُبْحَانَ اللّٰهِ
अल्लाह हर कमी से पाक है।
संख्या: हदीस शरीफ़ — मुस्लिम, मसाजिद 146 (नं. 597); बुख़ारी, अज़ान 155 (नं. 843)। सहीह।
अल्हम्दुलिल्लाह × 33
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ
सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है।
संख्या: हदीस शरीफ़ — मुस्लिम, मसाजिद 146 (नं. 597); बुख़ारी, अज़ान 155 (नं. 843)। सहीह।
अल्लाहु अकबर × 33
اَللّٰهُ أَكْبَرُ
अल्लाह सबसे बड़ा है।
संख्या: हदीस शरीफ़ — मुस्लिम, मसाजिद 146 (नं. 597); बुख़ारी, अज़ान 155 (नं. 843)। सहीह।
ला इलाहा इल्लल्लाह × 100
لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं।
«सबसे अफ़ज़ल ज़िक्र ला इलाहा इल्लल्लाह है»: हदीस शरीफ़ — तिर्मिज़ी, दअवात 9 (नं. 3383); इब्न माजा, अदब 55 (नं. 3800)। तिर्मिज़ी ने इसे हसन कहा है। सौ की संख्या लंबे कलिमे («…वहदहू ला शरीका लहू…») के लिए बुख़ारी, दअवात 65 (नं. 6403) और मुस्लिम, ज़िक्र 28 (नं. 2691) में है; इस छोटे कलिमे के लिए यह आम रिवाज है।
ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू… × 100
لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
उच्चारण: ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और तारीफ़ उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
दिन में सौ बार: हदीस शरीफ़ — बुख़ारी, दअवात 65 (नं. 6403); मुस्लिम, ज़िक्र 28 (नं. 2691)। नमाज़ के बाद सौ पूरा करने के लिए एक बार: मुस्लिम, मसाजिद 146 (नं. 597)। सहीह।
दुरूद शरीफ़ × 100
اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ
उच्चारण: अल्लाहुम्मा सल्लि अला सय्यिदिना मुहम्मद
ऐ अल्लाह! हमारे आक़ा मुहम्मद पर रहमत नाज़िल फ़रमा।
दुरूद का हुक्म: सूरह अल-अहज़ाब, 56। सौ की संख्या किसी रिवायत से नहीं, आम रिवाज से है।
अस्तग़फ़िरुल्लाह × 100
أَسْتَغْفِرُ اللّٰهَ
मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ।
दिन में सौ बार इस्तिग़फ़ार: हदीस शरीफ़ — मुस्लिम, ज़िक्र 41 (नं. 2702); दिन में सत्तर से ज़्यादा बार: बुख़ारी, दअवात 3 (नं. 6307)। सहीह।
ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह × 33
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللّٰهِ
ताक़त और क़ुव्वत सिर्फ़ अल्लाह की मदद से है।
अल्फ़ाज़: हदीस शरीफ़ — बुख़ारी, दअवात 50 (नं. 6384); मुस्लिम, ज़िक्र 44 (नं. 2704)। सहीह। संख्या आम रिवाज है।
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