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फ़ज्र की नमाज़ पढ़ने का तरीका चरण-दर-चरण

फ़ज्र की नमाज़: 2 सुन्नत + 2 फ़र्ज़. नीयत, तकबीर-ए-तहरीमा, क़ियाम और क़िराअत, रुकू, क़ौमा, सजदा, दूसरी रकअत, क़ादा-ए-आख़िरा, सलाम.

यह मार्गदर्शन हनफ़ी मसलक के अनुसार है। Mubarly ऐप इसे चारों मसलकों के अनुसार दिखाता है।

रकअत: 2 सुन्नत + 2 फ़र्ज़

अदा करने का तरीक़ा

  1. नीयत

    نَوَيْتُ اَنْ اُصَلِّيَ لِلّٰهِ تَعَالٰى

    मैंने अल्लाह की रज़ा के लिए नमाज़ पढ़ने की नीयत की। हिंदी में: “नीयत की मैंने अल्लाह की रज़ा के लिए फ़ज्र की फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ने की।”

    नीयत दिल से होती है: यह जानना काफ़ी है कि कौन-सी नमाज़ पढ़ी जा रही है।

  2. तकबीर-ए-तहरीमा

    اَللّٰهُ اَكْبَرُ

    अल्लाह सबसे बड़ा है।

    मर्द हाथों को कानों तक, औरतें कंधों तक उठाकर "अल्लाहु अकबर" कहते हैं।

  3. क़ियाम और क़िराअत

    بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ

    अल्लाह के नाम से जो रहमान और रहीम है।

    खड़े रहकर सना (सुब्हानक), अऊज़ु-बिस्मिल्लाह, फ़ातिहा और उसके बाद कोई सूरह या कम से कम तीन छोटी आयतें पढ़ी जाती हैं।

  4. रुकू

    سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ

    मैं अपने अज़मत वाले रब को हर कमी से पाक मानता हूँ।

    "अल्लाहु अकबर" कहकर झुका जाता है, घुटनों को पकड़ा जाता है; पीठ और सिर सीधे रहते हैं।

  5. क़ौमा

    سَمِعَ اللّٰهُ لِمَنْ حَمِدَهُ رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ

    अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी हम्द की। ऐ हमारे रब, तारीफ़ तेरे ही लिए है।

    रुकू से "समिअल्लाहु लिमन हमिदह" कहते हुए सीधे खड़े होते हैं और "रब्बना लकल-हम्द" कहते हैं।

  6. सजदा

    سُبْحَانَ رَبِّيَ الْاَعْلٰى

    मैं अपने सबसे बुलंद रब को हर कमी से पाक मानता हूँ।

    "अल्लाहु अकबर" कहकर सजदे में जाया जाता है; माथा, नाक, हाथ, घुटने और पैरों की उँगलियाँ ज़मीन पर लगती हैं, तस्बीह कम से कम तीन बार कही जाती है।

  7. दूसरी रकअत

    بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ

    अल्लाह के नाम से जो रहमान और रहीम है।

    दूसरे सजदे से "अल्लाहु अकबर" कहकर खड़े होते हैं।

  8. क़ादा-ए-आख़िरा

    اَلتَّحِيَّاتُ لِلّٰهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ

    हर तरह की ताज़ीम, दुआ और पाकीज़ा बातें अल्लाह ही के लिए हैं।

    आख़िरी बैठक में अत्तहिय्यात, सल्लि-बारिक और रब्बना की दुआएँ पढ़ी जाती हैं।

  9. सलाम

    اَلسَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ

    तुम पर अल्लाह की सलामती और रहमत हो।

    पहले दाईं तरफ़, फिर बाईं तरफ़ सलाम फेरकर नमाज़ ख़त्म की जाती है।

पूरा मार्गदर्शन मुफ़्त Mubarly ऐप में है: हर चरण की व्याख्या, चारों मसलक, और दुआएँ और बहुत कुछ। ↓

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